shani ki sadhe saathi for Pisces (मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती)

मीन राशि

राशि चक्र में अंतिम अर्थात 12वें नंबर की राशि है मीन राशि इसके स्वामी हैं गुरु शनि गुरु से समभाव रखतें हैं परन्तु इस राशि में हमें बहुत अधिक शुभ फल नहीं प्राप्त होते !
नवग्रह में शनि देव को न्यायधीश की पदवी दी गयी है हमारे कर्मों के अनुसार यह हमें अपनी महादशा , अन्तर्दशा और साढ़ेसाती के फल देते हैं , मीन राशि पर चलने वाली साढ़ेसाती शुभकारी नहीं होती मीन राशि की साढ़ेसाती के बारे में नीचे आपको सामान्य जानकारी दी जा रही है इसमें बताये गए सभी शुभ और अशुभ फल आपके कर्मों के अनुसार और आपकी कुंडली में उपस्थित ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करते है इसमें आपको कुछ सावधानियां भी बताई गयी है जिन्हें अपनाकर आप अशुभ फलों में कमी कर सकते हैं

प्रथम चरण :- गोचर में जब शनि कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं तो मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रथम चरण आरम्भ होता है इस चरण में शनि अपनी राशि में होते हुए भी बहुत शुभकारी नहीं होते क्यूंकि कुंभ राशि से वह मेष सिंह और वृश्चिक राशि को देखते हैं यहाँ पर उनकी दृष्टि अपने शत्रुओं पर होती है इसलिए यह समय शुभ फल नहीं देता !

प्रथम चरण में मिलने वाले अशुभ फल :-
• ख़राब स्वास्थ्य
• मानसिक अशांति
• आर्थिक हानि
• खर्चों में लगातार वृद्धि
• कठोर वाणी के कारण हानि और अपमान
• व्यवहार में जिद्दीपन और क्रोध जिसके कारण हानि
• नौकरी में सहयोगियों और उच्चाधिकारीयों से अच्छा तालमेल का न होना
• छोटी छोटी बातों पर लडाई झगडे
• सहनशक्ति में कमी
• व्यवसाय में हानि
• शत्रुओं की संख्या में वृद्धि
• विदेश यात्राएं और उनमें हानि

इस चरण में मिलने वाले शुभ फल :-
• परेशानी में भी जातक धार्मिक कार्य करेगा
• ध्यान अध्यातम की ओर
• परोपकारी
• नया व्यवसाय आरम्भ में तो नुक्सान देगा , परन्तु बाद में लाभ देगा
• मीन राशि वाले जो लोग मशीनरी से सम्बंधित काम करते हैं अथवा चिकत्सक हैं अथवा कोई भी चिकित्सा सम्बंधित कार्य करते हैं तो अवश्य ही इस चरण में लाभ होगा

सावधानियां :-
• अपने व्यवसाय में पूर्ण गोपनीयता रखें अन्यथा हानि हो सकती है
• इस समय में किसी भी प्रकार का कोई नशा ना करें क्यूंकि ऐसा देखा गया है की इस समय में नशा करने वालों को ज्यादा हानि होती है

दूसरा चरण :- गुरु के गोचर में मीन राशि में प्रवेश करते ही मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण आरम्भ हो जाता है मीन राशि वालों के लिए साढ़ेसाती का दूसरा चरण भी अशुभ रहता है परन्तु भगवान् और शनि देव की उपासना से इन अशुभ फलों को कम किया जा सकता है

इस चरण में मिलने वाले अशुभ फल :-
• आर्थिक रूप से असुन्त्ष्ट
• मेहनत का अच्छा परिणाम नहीं
• आलसी
• रिश्तेदारों के साथ सम्बन्ध में तनाव
• नौकरी में कोई न कोई समस्या
• व्यापार में प्रतिद्वंदियों द्वारा छवि ख़राब करने का प्रयास
• अचानक होने वाली हानि के कारण क्रोधित

इस चरण में मिलने वाले शुभ फल :-
• अध्यन के क्षेत्र में की गयी मेहनत आपको लाभ दे सकती है
सावधानियां :-
• अपनी कठोर वाणी और क्रोध पर संयम रख कर आप सफल हो सकते हैं
• दांपत्य जीवन में सावधानी रखें कोई भी ऐसा काम न करें जिससे जीवनसाथी के विश्वास को ठेस लगे
• साझेदारों पर विश्वास न करें आपको धोखा दे सकते हैं
• किसी भी प्रकार का निवेश न करें , और किसी को उधार न दें

तीसरा चरण :- शनि के गोचर में मेष राशि में प्रवेश के साथ ही मीन राशि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण आरम्भ हो जाता है मेष राशि के स्वामी मंगल और शनि प्रबल शत्रु हैं इस चरण में बहुत अधिक शुभ फल प्राप्त नहीं होते !

इस चरण में प्राप्त होने वाले अशुभ फल :-
• वाणी में कठोरता और क्रोध हर प्रकार की हानि का कारण बनेगा
• मित्रों व् परिवारजनों के लिए व्यवहार स्वार्थपूर्ण होगा
• नौकरी करते होंगे तो आप पर कोई आरोप लग सकता है जिससे स्थानांतरण की सम्भावना
• व्यवसाय में हानि
• कर्जा चुकाने के लिए किसी भौतिक संपत्ति को बेचना पड़ सकता है
• पैत्रिक संपत्ति से वांछित
• संपत्ति का विवाद हो तो फैसला आपके खिलाफ
• सरकार की तरफ से हानि
• भोग विलास पर फालतू का खर्च
• अपने ही लोगों से शत्रुता और विरोध का सामना
• संतान से पीड़ा
• मानसिक तनाव

सावधानियां :-
• खान पान पर नियंत्रण रखें अन्यथा आपको पेट सम्बंधित परेशानियां हो सकती हैं
• अंतिम चरण में अशुभ समय को झेलने के लिए आत्मविश्वास बना कर रखें अपने निकटतम लोगों से परामर्श लें , कोई भी नया कार्य आरम्भ न करें , जल्दबाजी में कोई भी ऐसा फैसला न करें जिससे सामाज और परिवार में हानि का भय हो !

नोट : मीन राशि की साढ़ेसाती अशुभ फल देती है इससे मिलने वाले हम अशुभ परिणामों को कम करने के लिए हम भगवान् में ध्यान लगा सकते हैं शनि देव की आराधना कर सकते हैं अपने से निम्न स्तर के लोग जैसे मजदूरो की सहायता कर सकते हैं , इस समय में हमें किसी के खिलाफ झूठी गवाही नहीं देनी चाहिए , किसी के हक का पैसा नहीं रखना चाहिए , ये सब सावधानियां शनि के साढ़ेसाती में मिलने वाले अशुभ फलों को कहीं न कहीं कम कर सकती हैं !

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उपाय :-
• छाया दान अवश्य करें
• शनि वार के दिन हनुमान जी , भैरो बाबा और शनिदेव की पूजा करें
• शनिवार को सुन्दर काण्ड का पाठ करें !
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|| जय माता दी ||
|| ज्योतिषाचार्या विनीता ||

 

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shani ki sadhe saathi for Aquarius (कुम्भ राशि पर शनि की साढ़ेसाती)

राशि चक्र में ग्यारहवे नंबर की राशि है कुम्भ राशि जिसके स्वामी है शनि देव । इस राशि की साढ़ेसाती का आरम्भ शनि के गोचर में मकर राशि में प्रवेश के साथ शुरू होता है ।
हमारे नवग्रह में शनि देव् न्याय के देवता है जिस तरह के हमारे करम होते है अपनी महादशा अंतर दशा और साढेसाती में उसी प्रकार के फल देते है हमे शनि देव । नीचे दी गयी जानकारी में कुम्भ राशि में शनि की साढ़ेसाती के शुभ अशुभ फल और सावधानियां दी जा रही है । ये सभी शुभ और अशुभ फल जातक के कर्मो और कुंडली में उपस्थित ग्रहो की स्थिति पर निर्भर करते है ।

प्रथम चरण

गोचर में मकर राशि में शनि के प्रवेश के साथ ही शनि की साढ़ेसाती का कुम्भ राशि पर आरम्भ हो जाता है । शनि स्वयं मकर राशि के स्वामी है ।इस चरण में शनि मिला जुला फल देते है ।

इस चरण में मिलने वाले अशुभ फल
-कई प्रकार की समस्याओं का सामना
-परिवार में कलेश
-खाने पर नियंत्रण नहीं समय असमय खाना बाजार का खाना ज्यादा पसंद करना जिसके कारण पेट सम्बंधित परेशानियां
-शत्रुओ में वृद्धि
-दांपत्य जीवन में समस्या
-कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हो तो आर्थिक समसयाएं , जमा पूंजी में कमी, नित्य नए खर्चे

इस चरण में मिलने वाले शुभ फल
-समसयाएं देखते देखते आप सत्यप्रिय हो जाएंगे
-सरकारी नौकरी तो अधिकारी आपसे प्रसन्न
-अगर आप व्यवसायी है तो यह चरण आपको अधिक लाभ दे सकता है ।
-कुम्भ राशि की महिलाये परिवार के लिए सहायक
-छात्रो को अधिक मेहनत करनी चाहिए अधिक मेहनत से वो सफल हो सकते है ।

सावधानियां-:
-वाणी पर संयम रखे , वाणी पर संयम आपको कई प्रकार की परेशानियों से बचा सकता है ।
-किसी नए संपर्क में आने वाले व्यक्ति से सावधान रहे ।
-राजनितिक लोगो से सावधान रहे
-व्यवसाय की योजनाओ को गुप्त रखे अनयथा उनका कोई लाभ उठा सकता है
-कोई भी नए योजना अथवा कार्य आरम्भ न करे चयन में गलती हो सकती है
-धन के क्षेत्र में सावधानी रखे अनयथा आवेश में आकर आप कोई बड़ा खर्चा कर सकते है

दूसरा चरण

गोचर में शनि के कुम्भ राशि में प्रवेश के साथ ही कुम्भ राशि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण आरम्भ हो जाता है । इस चरण में शनि राशि स्वामी होने के साथ अपनी ही राशि में बैठते है फिर भी इसमें अशुभ फल अधिक मिलते है । इसमें शनि की दृष्टि मेष , सिंह और वृश्चिक राशि पर होती है जिसके स्वामी मंगल और सूर्य है जो शनि के प्रबल शत्रु है ।इस समय ईश्वर की आराधना और शनि का स्मरण अशुभ फल से बचा सकता है ।

इस चरण में मिलने वाले अशुभ फल
-आरम्भ में ही बड़ी हानि या दुर्घटना
-किसी गलत इंसान के पीछे चलकर आप अपना शारीरिक और आर्थिक हानि कर सकते है
व्यवसाय में हानि हानि का कारण भी अपने ही कर्मचारी
-अपने ज़िद्दी स्वाभाव के कारण आपके गलत निर्णयो पर ही अड़े रहेंगे जिसके कारण आपके अधिकारी रुष्ट और परिवार वाले दूर हो जाएंगे
-दांपत्य जीवन में अरुचि
-अनैतिक और गलत कार्यो की तरफ रुझान
-दाम्पत्य जीवन में कलेश
-मन में अशांति
-नए कार्य में असफलता और आर्थिक हानि
-समाज और परिवार में अपमान की संभावना
-मानसिक कष्ट, फोड़े फुन्सी, पेट के रोग, कफ से जूडी समस्या
-स्त्रियो में गर्भपात और delivery में परेशानी

इस चरण में मिलने वाले शुभ फल
-ईश्वर में आस्था
-समय समय पर घर में पूजा और हवन
सावधानियां
-मन में अनैतिक और अवेध कार्य करने के विचार परंतु उनसे दूर रहे ।
-कोई भी कार्य करे अपने परिवार के बड़े सदसयो से सलाह लेकर करे ।

तीसरा चरण

गोचर में शनि के मीन राशि में प्रवेश के साथ ही तीसरा और अंतिम चरण आरम्भ हो जाता है ।इस चरण में शनि गुरु की राशि मीन राशि में होते है ।शनि और गुरु आपस में समभाव रखते है फिर भी इस चरण में विशेष सावधानी रखे ।
इस चरण में मिलने वाले अशुभ फल
-सहयोगियों से धोखा
-व्यवसाय में साझेदारों से धोखा
-दाम्पत्य जीवन में कोई विशेष रूचि नहीं
-खाने पीने की रूचि पेट के रोग दे सकती है
-सरकारी नौकरी तो जनता से कोई आरोप

इस चरण में मिलने वाले शुभ फल
-व्यवहार अच्छा और सम्मानजनक
-respected लोगो से नए रिलेशन
-प्रयत्न करे तो नया वाहन या भवन खरीद सकते है
-व्यवसाय में संतुष्ट
-आपसे बड़ी आयु के लोगो का आपको सहयोग
-कार्य क्षेत्र में अपनी मेहनत से लाभ
सावधानियां
-किसी भी प्रकार के फ़ालतू विवादों से दूर रहे नहीं तो अपमान और परिवार के विरोध का सामना करना पढ़ सकता है ।
-कुम्भ राशि वाली कन्याओं के लिए विवाह के लिए अच्छा समय परंतु रिश्ते से पहले ससुराल वालो की enquiry कर ले ।

तीसरा चरण

गोचर में शनि के मीन राशि में प्रवेश के साथ ही तीसरा और अंतिम चरण आरम्भ हो जाता है ।इस चरण में शनि गुरु की राशि मीन राशि में होते है ।शनि और गुरु आपस में समभाव रखते है फिर भी इस चरण में विशेष सावधानी रखे ।
इस चरण में मिलने वाले अशुभ फल
-सहयोगियों से धोखा
-व्यवसाय में साझेदारों से धोखा
-दाम्पत्य जीवन में कोई विशेष रूचि नहीं
-खाने पीने की रूचि पेट के रोग दे सकती है
-सरकारी नौकरी तो जनता से कोई आरोप
इस चरण में मिलने वाले शुभ फल
-व्यवहार अच्छा और सम्मानजनक
-respected लोगो से नए रिलेशन
-प्रयत्न करे तो नया वाहन या भवन खरीद सकते है
-व्यवसाय में संतुष्ट
-आपसे बड़ी आयु के लोगो का आपको सहयोग
-कार्य क्षेत्र में अपनी मेहनत से लाभ

सावधानियां

-किसी भी प्रकार के फ़ालतू विवादों से दूर रहे नहीं तो अपमान और परिवार के विरोध का सामना करना पढ़ सकता है ।
-कुम्भ राशि वाली कन्याओं के लिए विवाह के लिए अच्छा समय परंतु रिश्ते से पहले ससुराल वालो की enquiry कर ले ।

 

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