Vastu (वास्तु )

11225091_941694799210126_125329495790595158_n 11707528_941694785876794_4317523721544510687_n 11707601_941694782543461_8278515160249020961_nशास्त्र सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा के सिद्धांत पर काम करता है। यदि घर में कोई वस्तु गलत स्थान पर रखी है तो उससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। जिस घर में नकारात्मक ऊर्जा रहती है, वहां रहने वाले लोगों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। साथ ही, अन्य कार्यों में भी शुभ फल प्राप्त नहीं हो पाते हैं। वास्तु की टिप्स का पालन किया जाए तो घर का वातावरण शुभ बना रहता है। यहां जानिए वास्तु की कुछ टिप्स, जिनसे घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है…

1. घर में तुलसी का पौधा रखना चाहिए। सुबह-सुबह तुलसी को जल अर्पित करें। शाम को तुलसी के पास दीपक जलाएं। पूर्व या उत्तर दिशा में तुलसी लगाने से आत्म विश्वास में बढ़ोतरी होती है।
2. घर का मुख्य द्वार पूर्व या उत्तर दिशा में हो तो श्रेष्ठ रहता है, लेकिन ऐसा न हो तो घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक, श्रीगणेश या अन्य कोई शुभ चिह्न लगाना चाहिए।
3. घर में खिड़की दरवाजों की संख्या सम हो तो शुभ रहता है। सम यानी 2, 4, 6, 8 या 10. दरवाजे खिड़कियां अंदर की तरफ खुलना चाहिए, यह श्रेष्ठ रहता है।
4. घर में फालतू और बेकार सामान नहीं होना चाहिए। इन चीजों से घर में तनाव बना रहता है।
5. धन संबंधी लाभ चाहते हैं तो तिजोरी का मुंह उत्तर या पूर्व दिशा में रखना चाहिए। धन के स्थान को सुगंधित बनाए रखना चाहिए। इसके लिए अगरबत्ती, इत्र, परफ्यूम आदि का उपयोग किया जा सकता है।
6. तिजोरी के दरवाजे पर कमल के आसन पर बैठी हुई महालक्ष्मी की तस्वीर लगानी चाहिए।
7. दक्षिण की दीवार पर दर्पण (Mirror) नहीं लगाना चाहिए। दर्पण पूर्व या उत्तर की दीवार पर होगा तो श्रेष्ठ रहेगा।
8. दीवार या छत पर दरार हो तो उन्हें जल्दी ठीक करवा लेना चाहिए।
9. शाम के समय कुछ देर के लिए पूरे घर में रोशनी अवश्य करनी चाहिए।
10. घर में मकड़ी के जाले नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर राहु ग्रह से संबंधित दोष बढ़ते हैं।
11. वास्तु की मान्यता है कि पूर्व दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से आयु बढ़ती है।
12. जो लोग उत्तर दिशा की ओर मुख करके भोजन करते हैं, उन्हें लंबी आयु के साथ ही लक्ष्मी कृपा भी प्राप्त होती है।
13. दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी जाती है। इस ओर मुख करके खाना खाने से भय बढ़ता है। बुरे सपने दिखाई देते हैं।
14. पश्चिम दिशा की ओर मुख करके खाना खाते हैं तो भोजन से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त नहीं हो पाता है। ध्यान रखें हमें उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके भोजन ग्रहण करना चाहिए।
15. हमेशा जमीन पर बैठकर ही भोजन करना चाहिए, लेकिन थाली को जमीन पर न रखें। भोजन की थाली किसी चौकी या आसन पर रखना चाहिए।

दिशाएं और उनके वास्तु अनुसार नाम

वास्तु में उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम दिशाओं के साथ ही चार अन्य दिशाएं भी बताई गई हैं। ये इस प्रकार हैं… उत्तर-पूर्व को ईशान कोण कहा जाता है। उत्तर-पश्चिम को वायव्य कोण, दक्षिण-पूर्व को आग्नेय कोण एवं दक्षिण-पश्चिम को नैऋत्य कोण कहा जाता है।
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|| जय माता दी ||
|| ज्योतिशाचार्या विनीता ||

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कुंडली के दोषों को शांत करने के लिए ज्योतिष में कई उपाय

कुंडली के दोषों को शांत करने के लिए ज्योतिष में कई उपाय बताए गए हैं, जिनसे शुभ फल प्राप्त किए जा सकते हैं। यहां जानिए सप्ताह के सातों दिनों के लिए छोटे-छोटे उपाय…

1. रविवार
रविवार सूर्य का दिन माना जाता है और इस दिन सूर्य की उपासना का विशेष महत्व है। सूर्य से शुभ फल प्राप्त करने के लिए हर रविवार गुड़ और चावल को नदी में प्रवाहित करें।

2. सोमवार
सोमवार चंद्र का दिन है। चंद्रमा से शुभ फल प्राप्त करने के लिए इस दिन भोजन में खीर भी शामिल करें। यदि कुंडली में चंद्र नीच का हो तो सफेद कपड़े पहनना चाहिए और श्वेत चंदन का तिलक लगाएं।

3. मंगलवार
मंगल की विशेष पूजा का दिन है मंगलवार। इस दिन मसूर की दाल का दान करें। जो लोग मंगली हैं, वे लाल वस्तुओं का दान विशेष रूप से करें। हर मंगलवार कुछ रेवड़ियां नदी में प्रवाहित करें। मीठा पराठा बनाकर गरीब बच्चों को खिलाएं। हनुमानजी की पूजा करें।

4. बुधवार
बुद्धि के देवता बुध ग्रह का दिन है बुधवार। जिन लोगों की कुंडली में बुध अशुभ फल दे रहा है वे इस दिन साबूत मूंग न खाएं और इसका दान करें। मंगलवार की रात को हरे मूंग भिगोकर रखें और बुधवार की सुबह यह मूंग गाय को खिलाएं।

5. गुरुवार
देव गुरु बृहस्पति का दिन है गुरुवार। जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह अच्छी स्थिति में नहीं है, वे लोग इस दिन किसी ब्राह्मण को पीले रंग के वस्त्र दान में दें। कढ़ी-चावल खुद भी खाएं और गरीब बच्चों को भी खिलाएं। पीला रुमाल अपने साथ रखें।

6. शुक्रवार
असुरों के गुरु शुक्र का दिन है शुक्रवार। इस दिन शुक्र ग्रह के लिए विशेष उपासना की जानी चाहिए। इस दिन दही और लाल ज्वार का दान करना चाहिए। सफेद रेशमी वस्त्रों का दान करें।

7. शनिवार
शनिवार को शनि की पूजा विशेष रूप से की जाती है। हर शनिवार एक नारियल नदी में प्रवाहित करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें। शनिदेव के दर्शन करें और तेल चढ़ाएं।
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|| ज्योतिशाचार्या विनीता ||